Analysis of the Role of Self-Help Groups (SHGs) in the Economic Empowerment of Rural Women
ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका का विश्लेषण
DOI:
https://doi.org/10.31305/rrijm.2026.v11.n05.015Keywords:
Self-Help Groups, Economic Empowerment, Microfinance, Rural Development, Women Entrepreneurship, Financial InclusionAbstract
Self-Help Groups (SHGs) have emerged as an important and transformative instrument for the economic empowerment of rural women, creating a “silent revolution” in rural India. This study analyzes the role of SHGs based on economic, social, and financial indicators. Through SHGs, women’s access to banking services has increased from 30 percent to 95 percent, while their participation in household decision-making has risen from 20 percent to 75 percent. Analysis of annual income reveals that the proportion of women in the income category above ₹60,000 has increased by 41.7 percent, reflecting their economic advancement. SHGs have enabled women to become self-reliant through microfinance, savings, skill development, and entrepreneurship, freeing them from the exploitation of moneylenders. Institutions such as the National Bank for Agriculture and Rural Development and the National Rural Livelihoods Mission have strengthened this model at the national level. The study also shows that SHGs are transforming women from “beneficiaries” into “active economic agents,” thereby promoting rural development and gender equality.
Abstract in Hindi Language: ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में स्वयं सहायता समूह (SHGs) एक महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी साधन के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने ग्रामीण भारत में “मूक क्रांति” का निर्माण किया है। यह अध्ययन SHGs की भूमिका का विश्लेषण आर्थिक, सामाजिक और वित्तीय संकेतकों के आधार पर करता है। SHGs के माध्यम से महिलाओं की बैंकिंग पहुँच 30 प्रतिशत से बढ़कर 95 प्रतिशत हो गई है, जबकि घरेलू निर्णयों में उनकी भागीदारी 20 प्रतिशत से बढ़कर 75 प्रतिशत तक पहुँच गई है। वार्षिक आय के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि ₹60,000 से अधिक आय वर्ग में महिलाओं की हिस्सेदारी में 41.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो उनकी आर्थिक उन्नति को दर्शाती है। SHGs ने सूक्ष्म वित्त, बचत, कौशल विकास और उद्यमिता के माध्यम से महिलाओं को साहूकारों के शोषण से मुक्त कर आत्मनिर्भर बनाया है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी संस्थाओं ने इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया है। अध्ययन यह भी दर्शाता है कि SHGs महिलाओं को ‘लाभार्थी’ से ‘सक्रिय आर्थिक कर्ता’ में परिवर्तित कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण विकास और लैंगिक समानता को बढ़ावा मिल रहा है।
Keywords: स्वयं सहायता समूह, आर्थिक सशक्तिकरण, सूक्ष्म वित्त, ग्रामीण विकास, महिला उद्यमिता, और वित्तीय समावेशन
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